Category: राज्य

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एलएलपी निपटारा योजना, 2020 शुरू की गई ; पंजीयक के पास वैधानिक रूप से आवश्यक दस्तावेज दाखिल करने में देरी की छूट एक बार ही होगी

यह देखा गया है कि देर से दाखिल करने पर अतिरिक्त शुल्क लागू होने के कारण, जो कि देरी के मामले में वास्तव में वित्तीय बोझ बन सकता है, सीमित देयता भागीदारी (एलएलपी) की एक बड़ी संख्या इसका अनुपालन नहीं कर रही है। देरी की कुल अवधि के लिए विलंब शुल्‍क का भुगतान करने में उनकी अक्षमता इसका मुख्‍य कारण है।कारोबारी सुगमता को बढ़ावा देने के लिए सरकार के निरंतर प्रयासों के तहत, लंबित दस्तावेजों को दाखिल करने तथा भविष्य में एक योग्य एलएलपी के रूप में सेवा करने के लिए डिफ़ॉल्ट एलएलपी को अतिरिक्त शुल्क में एक बार की छूट देने का निर्णय लिया गया है।तदनुसार, केंद्र सरकार ने पंजीयक के पास वैधानिक रूप से आवश्यक दस्तावेज दाखिल करने में पंजीयक एक बार देरी की अनुमति देकर “एलएलपी सेटलमेंट स्कीम, 2020” नामक एक योजना शुरू करने का निर्णय लिया है।ऐसे एलएलपी, जो स्वयं योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, लंबित दस्तावेजों/प्रपत्रों को दाखिल कर सकते हैं और इस तरह के चूक के लिए मुकदमा चलाने से बचने के लिए एक बार ही ऐसी चूक कर सकते हैं।यह योजना 16 मार्च, 2020 को लागू होगी और यह 13 जून, 2020 तक प्रभावी रहेगी। यह अतिदेय दस्तावेज दाखिल करने के लिए “डिफ़ॉल्ट एलएलपी” पर लागू होगा, जो 31 अक्टूबर, 2019 तक दाखिल करने के लिए था।  इस तरह के दस्तावेज़ या रिटर्न दाखिल करने के लिए देय किसी भी शुल्क के अलावा, विलंब शुल्क की अवधि से प्रतिदिन 10 रुपये के एक मामूली अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करना होगा। इसके लिए प्रति दस्तावेज अधिकतम राशि 5,000 रुपये होगी।योजना निम्नलिखित दस्तावेजों के दाखिल करने के लिए लागू होगी:प्रपत्र 3- सीमित देयता भागीदारी समझौते और परिवर्तनों के संबंध में जानकारी, यदि कोई होप्रपत्र-4- नामित साझेदार अथवा साझेदार की नियुक्ति, समाप्ति की सूचना, नाम/पता/पदनाम में परिवर्तन तथा साझेदार /नामित साझेदार बनने के लिए सहमति/नामित भागीदार बनने के लिए सहमति की सूचना;प्रपत्र-8- खाता और सॉल्वेंसी का विवरण (वार्षिक या अंतरिम); तथाप्रपत्र-11- सीमित देयता भागीदारी (एलएलपी) का वार्षिक रिटर्न।इस योजना को देश के नागरिकों के रहन-सहन में अधिक से अधिक आसानी प्रदान करने के सरकार के लक्ष्‍य के अनुसरण में शुरू किया जा रहा है और एलएलपी के लिए एक महत्वपूर्ण राहत और अवसर प्रदान करने की उम्मीद है, जो कानून का पालन करें और तदनुसार व्यापार करें।

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स्पष्टीकरण

पिछले कुछ दिनों से, विभिन्न लोगों और संगठनों द्वारा प्रधानमंत्री तथा अन्य अधिकारियों को ई-मेल भेजे जा रहे हैं, जिसमें नीति आयोग  के विज़न डॉक्यूमेंट का जिक्र करते हुए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत पशुधन को शामिल करने के लिए नीति आयोग  द्वारा कथित प्रस्ताव पर चिंता जताई जा रही है   यह स्पष्ट किया गया है कि नीति आयोग  ने कभी भी पीडीएस या किसी अन्य पोषण कार्यक्रम के तहत अंडे, मांस, मछली या किसी अन्य पशुधन को शामिल करने का प्रस्ताव या चर्चा नहीं की है। कुछ समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचार भ्रामक तथा बिना किसी आधार के हैं। नीति आयोग  सभी संबंधित पक्षों को यह आश्‍वस्‍त करना चाहता है कि ऐसा सुझाव या सिफारिश देने के बारे में उसका कोई प्रस्ताव नहीं है, जो समाज के किसी वर्ग की भावनाओं को आहत करता हो।

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राष्‍ट्रपति ने 61वें वार्षिक ललित कला अकादमी पुरस्‍कार प्रदान किए

राष्‍ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद ने आज (04 मार्च, 2020) राष्‍ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में 15 श्रेष्‍ठ कलाकारों को 61वें वार्षिक ललित कला अकादमी पुरस्‍कार प्रदान किए।जिन कलाकारों को आज सम्‍मानित किया गया वे हैं: अनूप कुमार मन्‍झुखी गोपी, डेविड मलाकार, देवेन्‍द्र कुमार खरे, दिनेश पांड्या, फारूख अहमद हलदर, हरिराम कुम्‍भावत, केशरी नंदन प्रसाद, मोहन कुमार टी, रतन कृष्‍ण साहा, सागर वसंत काम्‍बले, सतविंदर कौर, सुनील थिरूवयूर, तेजस्‍वी नारायण सोनावाने, यशपाल सिंह और यशवंत सिंह। इन कलाकारों की कला का प्रदर्शन 22 मार्च 2020 तक, नई दिल्‍ली स्थित ललित कला अकादमी दीर्घा में किया जाएगा।ललित कला अकादमी कला को बढ़ावा देने और प्रतिभा को सम्‍मानित करने के लिए हर वर्ष कला प्रदर्शनियां और पुरस्‍कार समारोह आयोजित करती है। यह प्रदर्शनी देश भर की प्रतिभाओं को एक स्‍थान पर लाती है और उभरती हुई कला प्रतिभाओं को प्रोत्‍साहित करती है ताकि वे पेंटिंग, मूर्तिकला, ग्राफिक्‍स, फोटोग्राफी, ड्राइंग, प्रतिष्‍ठापन और मल्‍टीमीडिया आदि की दुनिया की नई प्रकृति और माध्‍यमों को सीख सकें।

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इलाज के लिए मुंबई जाने वाले शासकीय सेवकों को मध्यालोक में मिलेगी आवास सुविधा

मध्य प्रदेश से बीमारी का इलाज कराने के लिए मुंबई जाने वाले प्रदेश के शासकीय, अर्द्धशासकीय अधिकारी, कर्मचारी तथा उनके परिवार के सदस्यों (माता, पिता, पत्नी, पुत्र, पुत्री)  को ‘मध्यालोक’ भवन मुंबई में रूकने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। यह सुविधा उन्हें वहां लगने वाले किराए में 40 प्रतिशत डिस्काउन्ट के रूप में मिलेगी।इस सुविधा को प्राप्त करने के लिए मध्य प्रदेश से अस्पताल/डॉक्टर का मैडिकल रैफरल सर्टिफिकेट ‘मध्यालोक’ मुंबई में चैक-इन करते समय प्रस्तुत करना होगा। मुंबई में मध्यप्रदेश शासन के ‘मध्यालोक’ भवन का वर्तमान में संचालन राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा किया जा रहा है।

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नमस्ते और आदाब की संस्कृति को अपनायें

कोरोना वायरस से बचाव के लिये सुरक्षित रहना ही पहला उपाय है। कोरोना वायरस संक्रमण वायरस है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को लगता है। कोरोना वायरस से ग्रसित व्यक्ति के सम्पर्क में आने पर यह वायरस फैलता है। इससे बचने के लिये संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनायें और सर्दी, खांसी और बुखार आने पर तुरन्त डाक्टर को दिखायें। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य श्रीमती पल्लवी जैन ने आज होटल पलाश में सम्पन्न मीडिया कार्यशाला में यह बात कहीं।प्रमुख सचिव ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार केन्द्र सरकार के साथ लगातार सम्पर्क में है। प्रदेश में कोरोना वायरस से संक्रमित कोई भी मरीज नहीं है। अभी तक 14 सैम्पल जांच के लिये पुणे लैब में भेजे गए थे, जिनमें से 13 सैम्पल की रिपोर्ट निगेटिव आयी है। एक रिपोर्ट आना बाकी है। प्रदेश में 420 लोग दूसरे देशों से आये हैं, जिनमें से 319 लोगों को 28 दिन ऑब्जर्वेशन में रखने के बाद सार्वजनिक जगहों पर जाने की अनुमति दे दी गयी है, 67 लोग अभी होम आइसोलेशन में हैं। इनमें से किसी भी व्यक्ति में कोरोना वायरस का संक्रमण नहीं पाया गया है। सभी लोग सुरक्षा की दृष्टि से होम आइसोलेशन में रखे गए थे।श्रीमती जैन ने बताया कि 6 मार्च को प्रदेश के 350 केन्द्रों पर वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। खजुराहो, सांची, ओरछा और अन्य पर्यटन स्थलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। प्रदेश में सभी जिलों में 2 से 6 बैड आइसोलेटेड किये गए हैं। जिले में तीन सदस्यीय रेपिड एक्शन टीम बनायी गयी है, जो सूचना मिलने पर सुरक्षा के साथ कार्यवाही सुनिश्चित करेगी। सभी ड्रग इन्स्पेक्टर्स को निर्देशित किया गया है कि कोई भी दवा-संस्थान व दुकान, दवाईयों और मास्क का अतिरिक्त भण्डारण न करे। साथ ही एम.आर.पी. से अधिक कीमत पर दवाइयों को विक्रय न करें। प्रदेश के सभी सैनिक केन्द्रों से भी सम्पर्क रखा जा रहा है, जिससे आवश्यकता पड़ने पर समन्वय के साथ कार्य किया जा सके।कोरोना वायरस से बचाव के लिये व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। सभी स्वास्थ्य केन्द्रों पर इसके संबंध में सूचनाएँ प्रदर्शित की गयी हैं और अस्पतालों में सर्दी, खांसी, और बुखार के मरीजों का अलग से परीक्षण शुरू किया गया है। यदि किसी मरीज की या उससे संबंधित सम्पर्क वाले व्यक्ति की ट्रेवल हिस्ट्री है, तो उसे निगरानी में रखा जा रहा है। इन सभी मरीजों के साथ सभी लोगों को बताया भी जा रहा है कि भारतीय संस्कारों के साथ अभिवादन करें, हाथ न मिलाएं। नमस्ते आदाब की संस्कृति को अपनायें, खांसते-छीकतें समय मुँह पर कपड़ा रखें और कोहनी से नाक, मुँह ढकें। सर्दी-खांसी से संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनायें। सार्वजनिक स्थलों पर जाने से बचें और 30 सेकण्ड तक साबुन से हाथ धोयें।आयुक्त स्वास्थ्य श्री प्रतीक हजेला ने बताया कि सभी अस्पतालों और नर्सिंग होम्स को इस संबंध में निर्देशित किया जा चुका है। सर्दी-खांसी और बुखार वाले मरीजों को विशेष निगरानी और सावधानी बरतने के लिये निर्देशित किया गया है। प्रदेश सरकार लगातार सजगता के साथ कार्य कर रही है। अभी तक प्रदेश में नोबल कोरोना वायरस का कोई भी मरीज नहीं पाया गया है। विशेष जानकारी के लिये टोल फ्री नम्बर 104 पर फोन कर जानकारी प्राप्त की जा सकती है एवं इसके संबंध में सूचना भी दी जा सकती है। कोरोना वायरस से बचने का सबसे बड़ा उपाय यह है कि अपने इम्यून सिस्टम को बढ़ाएं। आयुर्वेदिक, होम्पोपैथिक दवाऍं भी सुरक्षा के रूप में ली जा सकती हैं। गिलोये, विटामिन-सी, च्यवनप्रास जैसी घरेलू दवाओं का उपयोग भी करें, जिससे शरीर का स्वरक्षा तंत्र मजबूत हो।आयुक्त स्वास्थ्य ने बताया कि प्रदेश में मरीजों को तीन केटेगिरी में रखा जा रहा है, पहले ऐसे मरीज जिनको सर्दी-खांसी है, लेकिन कोरोना के कोई लक्षण नहीं हैं, इनका सामान्य इलाज सभी अस्पतालों में किया जा रहा है। दूसरे ऐसे लोग जो विदेशों से आएं हैं या उनके सम्पर्क में रहे हैं, उनका होम आइसोलेशन कर परीक्षण कराया जा रहा है। तीसरे वे मरीज जो कोरोना वायरस संक्रमित पाये जायेंगे, उनको स्पेशल वार्ड में रखने के लिये कार्ययोजना बनायी गयी है।नोबल कोरोना वायरस से बचाव और रोकथाम के लिये सभी जिलों में कलेक्टर्स की अध्यक्षता में टास्क-फोर्स का गठन किया गया है। प्रदेश और जिला स्तर पर प्रतिदिन मॉनिटरिंग सैल की बैठक हो रही है। राज्यस्तर पर पी.सी. सेठी अस्पताल, महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज इंदौर, जे.पी. अस्पताल एवं हमीदिया अस्पताल भोपाल को चिन्हित किया गया है। मरीजों के सैम्पल कलैक्शन और ट्रान्सपोर्ट के लिये एम्स भोपाल, बुन्देलखण्ड मेडिकल कॉलेज सागर, राष्ट्रीय जनजातीय स्वास्थ्य अनुसंधान जबलपुर, श्याम शाह मेडिकल कॉलेज रीवा, गजरा राजा मेडिकल कॉलेज ग्वालियर एवं एम.जी. मेडिकल कॉलेज इंदौर को चिन्हित किया गया है। सभी जिलों में मॉकड्रिल की जा चुकी है।

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विधानपरिषद लक्षवेधी :

मुंबई

 अन्न व औषध प्रशासन विभागांतर्गत येणाऱ्या अन्न चाचणी प्रयोगशाळेतील रिक्त असलेल्या तांत्रिक पदांच्या अनुषंगाने उच्चस्तरीय सचिव समितीची मान्यता घेण्याची कार्यवाही सुरू आहे. समितीच्या मान्यतेनंतर पुढील अधिवेशनाच्या आत पदभरती करण्यात  येईलअसे अन्न व औषध प्रशासन मंत्री डॉ.राजेंद्र शिंगणे यांनी विधानपरिषदेत सांगितले.सदस्य प्रा. अनिल सोले यांनी नागपूर येथील अन्न चाचणी प्रयोगशाळेतील रिक्त पदांविषयीची लक्षवेधी मांडली होती. या लक्षवेधीला उत्तर देताना श्री. शिंगणे बोलत होते. अन्न व औषध प्रशासनात विविध संवर्गात 1183 पदे मंजूर आहेत.  यात अन्न व औषध चाचणी प्रयोगशाळांतील एकूण 103 तांत्रिक पदांचा समावेश आहे. या पदांसाठी उच्चस्तरीय सचिव समितीची मान्यता घेणे आवश्यक आहे. त्यानुसार समितीची मान्यता घेऊन पदभरती करण्यात येईल. अन्न चाचणी प्रयोगशाळा ही अन्न सुरक्षेच्या दृष्टीने अत्यंत महत्वाची प्रयोगशाळा आहे. त्यामुळे या प्रयोगशाळांचे सक्षमीकरण करण्यात  येईल. सद्यस्थितीत नागपूरमुंबई आणि औरंगाबाद येथे अन्न चाचणी प्रयोगशाळा कार्यरत आहेत. येत्या काळात नाशिकपुणे येथेही अन्न चाचणी प्रयोगशाळा उभारण्यात येईलअसे श्री. शिंगणे यांनी विधानपरिषदेत सांगितले.लक्षवेधीवरील चर्चेत सदस्य सर्वश्री रामदास आंबटकरनागो गाणारअंबादास दानवेगिरीश व्यास यांनी भागसारथीप्रकरणी अपर मुख्य सचिवांच्या अध्यक्षतेखाली त्रिसदस्यीय समिती  बहुजन कल्याण मंत्री विजय वडेट्टीवारराज्यातील मराठामराठा-कुणबी व कुणबी-मराठा यांच्या सामाजिकआर्थिक व शैक्षणिक विकासासाठी स्थापन करण्यात आलेल्या सारथी संस्थेतील गैरव्यवहारप्रकरणी सामान्य प्रशासन विभागाचे अपर मुख्य सचिव सीताराम कुंटे यांच्या अध्यक्षतेखाली त्रिसदस्यीय समितीची स्थापना करण्यात आली आहे. या समितीचा अहवाल येत्या दहा दिवसात येणार असून अहवालानंतर दोषींवर कठोर कारवाई करण्यात येईलअसे बहुजन कल्याण मंत्री विजय वडेट्टीवार यांनी विधानपरिषदेत सांगितले.सदस्य सतिश चव्हाण यांनी सारथी संस्थेतील गैरव्यवहारप्रकरणी लक्षवेधी उपस्थित केली होती. या लक्षवेधीला उत्तर देताना श्री.वडेट्टीवार बोलत होते. राज्यातील मराठामराठा-कुणबी व कुणबी-मराठा यांच्या सामाजिकआर्थिक व शैक्षणिक विकासासाठी छत्रपती शाहू महाराज संशोधनप्रशिक्षण व मानव विकास संस्थेची (सारथी) स्थापना करण्यात आली आहे. या संस्थेची स्वायत्तता कायम ठेवण्यात येणार आहे. पुढील वर्षीच्या अर्थसंकल्पात या संस्थेसाठी अर्थसंकल्पात पुरेशी तरतूद करण्यात येईलअसे श्री.वडेट्टीवार यांनी सांगितले.सारथी गैरव्यवहारप्रकरणाची चौकशी करण्यासाठी मदत व पुनर्वसन विभागाचे सचिव किशोरराजे निंबाळकर यांच्या अध्यक्षतेखाली चौकशी समिती नेमण्यात आली होती. या समितीने पुणे येथील सारथीच्या मुख्यालयात जाऊन या प्रकरणाची चैाकशी केली. त्यानंतर या प्रकरणाची अधिक चौकशी करण्यासाठी श्री. कुंटे यांच्या अध्यक्षतेखाली ही समिती गठित करण्यात आली आहे. सारथी अंतर्गत येणाऱ्या विद्यार्थ्यांचे शिष्यवृत्तीविद्यावेतनाचे पैसे थकित असल्यास ते येत्या 15 दिवसाच्या आत दिले जातीलअसे श्री.वडेट्टीवार यांनी सांगितले.लक्षवेधीवरील चर्चेत सदस्य सर्वश्री महादेव जानकरभाई गिरकरसुरेश धस यांनी          मुंबईतील जे.जे. रुग्णालयात कर्करोग उपचार केंद्र सुरू करणार  वैद्यकीय शिक्षण मंत्री अमितदेशमुखमुंबईत कर्करोग रुग्णांची उपचाराची गरज लक्षात घेता येत्या काळात मुंबईतील जे.जे. रुग्णालयात कर्करोग उपचार केंद्र सुरू करण्यात येणार असल्याचे वैद्यकीय शिक्षण मंत्री अमित देशमुख यांनी विधानपरिषदेत सांगितले.सदस्य जोगेंद्र कवाडे यांनी विधानपरिषदेत मुंबईतील जे.जे. रुग्णालयातील सोई-सुविधांविषयीची लक्षवेधी उपस्थित केली होती. या लक्षवेधीला उत्तर देताना श्री. देशमुख बोलत होते. मुंबईतील जे.जे. रुग्णालयाला लवकरच दिडशे वर्ष पूर्ण होणार आहे. विविध कार्यक्रमाचे आयोजन यानिमित्त करण्यात येणार आहे. यादरम्यान जे.जे. रुग्णालयात कर्करोग उपचार केंद्र सुरू करण्यात येणार आहे. जे.जे. रुग्णालयातील हृदय शस्त्रक्रिया विभाग कार्यरत असून या संस्थेत कुठल्याही हृदय शस्त्रक्रिया बंद पडलेल्या नाहीत. अपुऱ्या औषध पुरवठ्याअभावीही कोणत्याही शस्त्रक्रिया बंद पडलेल्या नसून रुग्णसेवा अखंडित सुरू असल्याचे श्री.देशमुख यांनी  यावेळी सांगितले.विधिमंडळ सदस्यांसाठी औषधोपचाराची एक योजना यापूर्वी अस्तित्वात होती. ती सध्या स्थगित आहे. मात्रकेवळ विधानसभा आणि विधानपरिषदच नव्हे तर लोकसभा आणि राज्यसभेच्या राज्यातील सदस्यांसाठी एक वेगळी योजना आणण्यासंदर्भात धोरण आखण्यात येईलअसे श्री.देशमुख यांनी या लक्षवेधीवरील एका उपप्रश्नाला उत्तर देताना सांगितले.लक्षवेधीवरील चर्चेत सदस्य विक्रम काळेभाई गिरकरअमरनाथ राजूरकरअनंतराव गाडगीळडॉ.परिणय फुके यांनी भाग घेतला.

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वन संरक्षित क्षेत्रों के आस पास रहने वाले युवाओं को कौशल प्रशिक्षण

 

वन मंत्री श्री उमंग सिंघार के निर्देश पर संरक्षित क्षेत्रों के आसपास रहने वाले युवक-युवतियों को कौशल विकास प्रशिक्षण देना आरंभ किया गया है। प्रथम चरण में 5 संरक्षित क्षेत्रों- कुनो राष्ट्रीय उद्यान और खिवनी, नौरादेही, रातापानी और रानी दुर्गावती अभयारण्य के 22 युवक-युवतियों का चयन कर उन्हें खजुराहो में आदिरातिथ्य (हॉसपिटेलिटी) का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के बाद इन्हें अच्छे होटलों में सम्मानजक काम मिल सकेगा।

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जल, थल, नभ, में शीर्ष पर है मध्यप्रदेश

 

वन मंत्री श्री उमंग सिंघार ने अन्तर्राष्ट्रीय वन्य-प्राणी दिवस पर प्रदेशवासियों को बधाई दी है। श्री सिंघार ने कहा कि यह गौरव की बात है कि प्रदेश के बाघ, तेन्दुआ, गिद्ध, घड़ियाल, बारासिंघा आदि अनेक प्राणियों की संख्या देश में सर्वाधिक है। प्रदेश में सर्वाधिक 526 बाघ, 1800 से अधिक तेन्दुआ, साढ़े 8 हजार गिद्ध और 1800 से अधिक घड़ियाल हैं। वन मंत्री ने कहा कि यह कामयाबी एक दिन का प्रयास नहीं बल्कि विभाग द्वारा किये जाने वाले सतत परिश्रम का परिणाम है।मंत्री श्री सिंघार ने कहा कि अखिल भारतीय बाघ आंकलन में मध्यप्रदेश 526 बाघों के साथ देश में पहले स्थान पर है। यही नहीं, तीन टाइगर रिजर्व पेंच, कान्हा और सतपुड़ा देश में प्रबंधकीय दक्षता में प्रथम तीन स्थान पर हैं। प्रदेश का टाइगर स्ट्राइक फोर्स भी लगातार राष्ट्रीय और अन्तर्राष्टीय स्तर के वन्य-प्राणी अपराधियों पर शिकंजा कस रहा है। तेन्दुआ की संख्या में भी लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। बारासिंघा की संख्या भी 66 से बढ़कर 800 के करीब पहुँच गई है।सम्पूर्ण विश्व में 99 प्रतिशत गिद्धों की समाप्ति से यह प्रजाति अति संकट में आ गई है। गिद्ध प्रकृति के सफाई कामगार हैं, जो सड़ा-गला माँस आदि मिनटों में चट कर पृथ्वी को महामारी से बचाते हैं। वन विभाग के प्रयासों से आज प्रदेश में 33 जिलों में लगभग साढ़े 8 हजार गिद्ध हैं। भोपाल के केरवा में गिद्ध प्रजजन केन्द्र बनाया जाकर इस विलुप्त होते प्राणी की संख्या बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं। प्रदेश में लगभग 500 प्रजाति के पक्षी पाये जाते हैं। इन पक्षियों की सुरक्षा के मद्देनजर भी वन विभाग पूरी ऐहतियात बरतता है।विलुप्ति की कगार पर पहुँच चुके घड़ियालों की पुनर्वापसी में भी प्रदेश के वन विभाग ने सराहनीय प्रयास किये हैं। चम्बल सेंक्चुरी में आज 1800 से अधिक घड़ियाल हैं, जो देश में अन्य स्थानों की गणना से काफी आगे हैं। सोन नदी और केन नदी में घड़ियालों को वैज्ञानिक तरीके से पोषण कर हर साल तकरीबन 200 घड़ियाल चम्बल नदी में छोड़े जा रहे हैं। मुरैना जिले के देवरी में ईको सेन्टर बनाया गया है, जहाँ पर घड़ियाल के अण्डे लाकर सेते जाते हैं। अण्डों में से निकले घड़ियाल जब 3 साल के हो जाते हैं, तो उन्हें चम्बल नदी में छोड़ दिया जाता है। विश्व में केवल भारत, नेपाल और बंगलादेश में ये घड़ियाल पाये जाते हैं।वन मंत्री श्री उमंग सिंघार ने बताया कि प्रदेश में वन्य जीव संरक्षित क्षेत्र 10 हजार 998 वर्ग किलोमीटर से अधिक है। यहाँ 10 राष्ट्रीय उद्यान और 25 वन्य-प्राणी अभयारण्य है। कान्हा, बाँधवगढ़, पन्ना, पेंच, सतपुड़ा और संजय राष्ट्रीय उद्यान तथा इनके निकटवर्ती 6 अभयारण्यों को समाहित कर 6 टाइगर रिजर्व बनाये गये हैं। डिण्डोरी जिले के घुघवा फॉसिल राष्ट्रीय उद्यान में 6 करोड़ वर्ष तक पुराने जीवाश्म संरक्षित किये गये हैं। धार जिले में डायनासोर जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान है। मुकुंदपुर (सतना) में सफेद टाइगर सफारी है। मगर, डालफिन, गौर, काला हिरण आदि भी प्रदेश की पहचान हैं।

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पार्षदों की निर्वाचन व्यय सीमा निर्धारित

 

राज्य शासन द्वारा नगरपालिक निगम, नगरपालिका परिषदों तथा नगर परिषदों में पार्षदों के निर्वाचन के लिये व्यय सीमा निर्धारित की गयी है। दस लाख से कम जनसंख्या वाले नगरपालिक निगमों में पार्षदों के निर्वाचन व्यय की अधिकतम सीमा 3 लाख 75 हजार रूपये और 10 लाख से अधिक जनसंख्या पर 8 लाख 75 हजार रूपये निर्धारित की गयी है।इसी तरह नगरपालिका परिषदों में एक लाख से अधिक जनसंख्या पर 2 लाख 50 हजार रूपये, 50 हजार से एक लाख तक जनसंख्या पर एक लाख 50 हजार रूपये और 50 हजार से कम जनसंख्या की नगरपालिका परिषदों के पार्षदों के निर्वाचन व्यय की अधिकतम सीमा एक लाख रूपये निर्धारित की गयी है। नगर परिषदों के लिये यह व्यय सीमा 75 हजार रूपये तय की गयी है।

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केन्द्र द्वारा मध्यप्रदेश में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान में नवाचारों की सराहना

 

महिला-बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार ने मध्यप्रदेश के अशोक नगर और कटनी जिले में ”बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” अभियान में किये गये नवाचारो की सराहना की है। अशोक नगर जिले में स्कूली छात्राओं में स्वास्थ्य संबंधी संकोच को समाप्त करने के लिये नवाचार स्वरूप ” शुचिता(पवित्रता) अभियान और कटनी जिले में ”स्वागतम नंदिनी” अभियान चलाया गया। दोनों जिलों में इन नवाचारों से लोगों की सोच में बेटियों के बारे में बदलाव देखने को मिले हैं।मध्यप्रदेश के अशोक नगर और कटनी जिले में महिला-बाल विकास विभाग द्वारा संचालित नवाचारों को सफलता की कहानी के स्वरूप में देशभर से चयनित 25 कहानियों के संग्रह में शामिल किया गया है। केन्द्रीय महिला-बाल विकास मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी इस कहानी संग्रह का 5 मार्च को नई दिल्ली में विमोचन करेंगी। विमोचन समारोह में सफलता की इन कहानियों पर आधारित डाक्यूमेन्ट्री फिल्मों का प्रदर्शन किया जायेगा और पैनल डिस्कशन भी होंगे।शुचिता (पवित्रता) अभियानअशोक नगर जिले में कलेक्टर डॉ. मंजू शर्मा ने स्कूली छात्राओं में स्वास्थ्य संबंधी संकोच को समाप्त करने के लिए शुचिता (पवित्रता) अभियान चलाया है। इस अभियान में छात्राओं को 5- एस (स्वास्थ्य, स्व-रक्षा, स्वच्छता, स्वाभिमान और स्वावलंबन) के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया है। अभियान का मूल उद्देश्य स्कूली छात्राओं को स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति सजग बनाना और माहवारी प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी देना और अच्छी गुणवत्ता वाले सेनेटरी नेपकिन की उपलब्धता सुनिश्चित कराना है।अभियान में जिले के कन्या विद्यालयों और शिक्षा विभाग, आदिम-जाति कल्याण और पिछड़ा वर्ग के छात्रावासों तथा आँगनवाड़ी केन्द्रों के माध्यम से लगभग 8 हजार बालिकाओं को शामिल किया गया है। अभियान में छात्राओं को स्व-सहायता समूह के माध्यम से मात्र एक रूपये की दर पर सेनेटरी नेपकिन के पैकेट उपलब्ध कराये जा रहे है। बालिका विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम, स्वास्थ्य परीक्षण और परामर्श शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं।स्वागतम नंदिनी अभियानकटनी जिले में कलेक्टर श्री शशि भूषण सिंह ने बेटी ”बचाओ-बेटी पढ़ाओ” अभियान में अभिनव पहल करते हुए ‘स्वागतम नंदिनी’ कार्यक्रम की शुरूआत की है। इसमें बच्चियों के जन्म पर माता-पिता और बच्ची को सम्मानित जा रहा है। अब जिला प्रशासन और समुदाय के बड़े बुर्जुगों द्वारा किसी भी परिवार में बच्ची के जन्म पर उत्सव मनाया जाता हैं। साथ ही नवजात बच्ची के माता-पिता को बेबी किट और लाडली लक्ष्मी योजना का प्रमाण-पत्र भी दिया जाता है।