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प्रधानमंत्री ने ‘श्रीराम जन्‍म भूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्‍ट बनाने की घोषणा की

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज संसद में उच्‍चतम न्‍यायालय के आदेश के अनुसार अयोध्‍या में राम मंदिर के निर्माण की निगरानी के लिए ट्रस्‍ट की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘उच्‍चतम न्‍यायालय के निर्देश के आधार पर मेरी सरकार ने आज ‘श्री राम जम्‍म भूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्‍ट बनाने के प्रस्‍ताव को मं निर्णय अयोध्‍या मामले में उच्‍चतम न्‍यायालय के ऐतिहासिक निर्णय के अनुरूप प्रधानमंत्री ने कहा कि माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय के निर्देश पर सरकार ने उत्‍तर प्रदेश की सरकार से सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन आवंटित करने का अनुरोध किया था और राज्‍य सरकार ने इस अनुरोध को स्‍वीकार किया।हम सभी भगवान राम और अयोध्‍या से जुड़े ऐतिहासिक और आध्‍यात्मिक महत्‍व को जानते हैं। यह भारतीय लोकाचार, भाव, आदर्श और संस्‍कृति में है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘भव्‍य राम मंदिर के निर्माण तथा रामलला के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की भावनाओं को ध्‍यान में रखते हुए सरकार ने एक और महत्‍वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने फैसला किया है कि लगभग 67.703 एकड़ अधिग्र‍हित भूमि नवगठित श्रीराम जन्‍म भूमि तीर्थ क्षेत्र न्‍यास को हस्‍तांतरित की जाएगी।’प्रधानमंत्री ने भारत की जनता द्वारा दिखाए गए आचरण की प्रशंसा की  प्रधानमंत्री ने अयोध्‍या मामले में माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय के निर्णय के बाद शांति और सद्भाव बनाए रखने में देश द्वारा दिखाई गई परिपक्‍कवता की सराहना की। जूरी दी है। ट्रस्‍ट अयोध्‍या में भव्‍य राम मंदिर के निर्माण से सम्‍बन्धित सभी निर्णय लेने के लिए स्‍वतंत्र होगा। उन्‍होंने इस बात को एक अलग ट्वीट में दोहराते हुए कहा, ‘भारत की जनता ने लोकतांत्रिक तौर-तरीकों तथा प्रक्रियाओं में उल्‍लेखनीय विश्‍वास दिखाया। मैं भारत की 130 करोड़ जनता का नमन करता हूं। भारत में रहने वाले सभी समुदाय एक बड़े परिवार के सदस्‍य हैं    प्रधानमंत्री ने कहा कि हम सभी एक परिवार के सदस्‍य हैं। यह भारत का लोकाचार है। हम प्रत्‍येक भारतीय को प्रसन्‍न और स्‍वस्‍थ देखना चाहते हैं। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्‍वास से निर्देशित होकर हम प्रत्‍येक भारतीय के कल्‍याण के लिए काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘आइये हम सब मिलकर भव्‍य राम मंदिर निर्माण की दिशा में काम करें।’

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डाॅ. अम्बेडकर और सीएए

मोदी सरकार द्वारा देश में नागरिकता संशोधन विधेयक जिसे संक्षेप में सीएए कहते हैं, वह 10 जनवरी 2020 से लागू कर दिया गया। इस कानून के तहत 31 दिसम्बर 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए सभी अल्पसंख्यकों यानी हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन और यहाँ तक कि ईसाई भी भारत की नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं। यद्यपि कांग्रेस समेत कई विरोधी दल एवं देश का एक बड़ा वर्ग इस कानून का उग्र विरोध कर रहा है। उनके द्वारा कहा जा रहा है कि यह डाॅ. भीमराव अम्बेडकर के बनाए संविधान के विरूद्ध है, क्योंकि यह धर्मनिरपेक्षता और समानता जो भारतीय संविधान का आधार है, उसका उल्लंघन करता है। ऐसी स्थिति में गौर करने की बात यह है कि यदि डाॅ. अम्बेडकर आज जीवित होते तो इस अधिनियम पर उनकी क्या प्रतिक्रिया होती?
वस्तुतः 1947 में देश के बंटवारे के बाद पाकिस्तान में हिन्दू और दूसरे अल्पसख्यकों के साथ कैसा व्यवहार होगा, यह दूरदृष्टा एवंमनीषी डाॅ. अम्बेडकर को उसी वक्त पूर्वाभास हो गया था। कोई कह सकता है- यह कैसे? यह इस तरह से कि देश के बंटवारे के वक्त ही डाॅ. अम्बेडकर ने जनसंख्या की अदला-बदली की बात कही थी। यानी पाकिस्तान में रह रहे हिन्दुओं एवं अन्य अल्पसंख्यकों को भारत आ जाना चाहिए, या भारत में लेना चाहिए और मुसलमानों को पाकिस्तान चले जाना या भेज देना चाहिए। डाॅ. अम्बेडकर सभी दलितों को भी जो पाकिस्तान में फंस गए थे, उनको कहा था कि उनको किसी भी तरीके या उपाय से पाकिस्तान से भारत आ जाना चाहिए। उन्होंने यहाँ तक कहा था कि मुसलमानों या मुस्लिम लीग पर दलितों का भरोसा उनके लिए घातक साबित होगा। इसीलिए उन्होंने सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, तब निजाम के राज हैदराबाद में रह रहे दलितों को भी चेतावनी देते हुये कहा था कि उच्चवर्गीय हिन्दुओं को नापसंद करने के चलते मुसलमानों के पाले में खड़ा होना एक बड़ी भूल होगी। (डाॅ.अम्बेडकर लाइफ एण्ड मिशन, धनंजय वीर पेज 399) कांग्रेस पार्टी और पं. जवाहरलाल नेहरू की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीतियों के चलते जालंधर में 19 अक्टूबर 1951 में डाॅ. अम्बेडकर ने पंडित नेहरू के लिए कहा था कि वह पागलपन की हद तक मुस्लिमों के साथ हैं और अनुसूचित जातियों के लिए उनके हृदय में कोई स्थान नहीं है। (वही पृ. 938)डाॅ. अम्बेडकर इस बात पर विश्वास करते थे कि यह असंभव है कि एक गैर मुस्लिम एक इस्लामिक देश में रह सके। उनका कहना था इस्लाम एक बंद समुदाय है और मुस्लिम और गैर मुस्लिम में यह अंतर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। मुसलमानों का भ्रातृत्व वैश्विक व्यक्तियों के लिए न होकर मात्र मुस्लिम का मुस्लिम के लिए है। उनका स्पष्ट मानना था कि मुस्लिम कानून के तहत दुनियाँ दो कैम्पों (शिविरों) में विभाजित है- दारूल-इस्लाम और दारूल हरब। दारूल-इस्लाम के मायने जो देश मुस्लिमों द्वारा शासित हैं, दारूल हरब के सामने जहाँ मुसलमान निवास तो करते हैं परन्तु शासन उनका नहीं रहता। इस तरह से भारत हिन्दुओं और मुसलमानों दोनों का सामान्य तौर पर मातृभूमि नहीं है, जहाँ वह बराबरी के साथ रह सके। बल्कि वह मुसलमानों की भूमि तभी होगी-जब मुसलमानों द्वारा शासित होगी। इस तरह से जबतक वह भूमि दारूल-इस्लाम नहीं बन जाती तब तक वह दारूल-हरब ही रहेगी। इसे किसी भी तरह जीतकर दारूल-इस्लाम बनाना है। (सिर्फ मुस्लिमों के लिए)जनसंख्या की अदला-बदली के सम्बन्ध में डाॅ. अम्बेडकर का कहना था कि हिन्दू या कोई गैर मुस्लिम, मुसलमानों की दृष्टि से काफिर है, जो सम्मान के योग्य नहीं है। ऐतिहासिक उदाहरण देते हुये उन्होंने बताया कि प्रमुख मुस्लिम हमेशा कट्टर और जिहादी मुस्लिमों का ही समर्थन करते हैं। इसीलिए डाॅ. अम्बेडकर का स्पष्ट मानना था कि पाकिस्तान में गैर मुस्लिमों को न्याय नहीं मिल सकता। इसीलिए उनका कहना था कि भारत और पाकिस्तान के बीच हिन्दुओं और मुसलमानों की जनसंख्या की अदला-बदली स्वैच्छिक ढंग से ग्रीस और बुल्गारिया की तर्ज पर होनी चाहिए।लोगो को पता ही होगा कि मोदी सरकार द्वारा लाए गए कानून का सबसे ज्यादा फायदा दलितों को होगा क्योंकि देश के बंटवारे के वक्त यह बड़ी तादाद में पाकिस्तान से नहीं निकल पाए। पाकिस्तान में इन्हें सफाई और ऐसे ही कामों के लिए जबरिया रोक लिया गया था। पर पंडित नेहरू ने इस सम्बन्ध में कोई पहल नहीं की। अब-जब मोदी सरकार यह कानून लेकर आई है तो सनक की हद तक मुस्लिम पक्षधरता के चलते कांग्रेस इसका बेतुका विरोध करती है जबकि मोदी सरकार के पूर्व यह उनके पक्ष में थी। यह बात अलग है कि मुस्लिम वोटबैंक के खौफ के चलते वह यह कानून नहीं ला सकी। कांग्रेस की बात अलग है, अपने को दलितों का मसीहा कहने वाला मायावती और भीम आर्मी के चन्द्रशेखर उर्फ रावण भी इसके तीव्र विरोध में हैं। समस्या वहीं मुस्लिम वोट बैंक। अब असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेता जब डाॅ. अम्बेडकर के संविधान का हवाला देकर इस कानून का विरोध कर रहे हैं, तो उन्हें पता होना चाहिए कि यदि डाॅ. अम्बेडकर का वश चलता तो वह देश के बंटवारे के वक्त ही यह समस्या समाप्त कर देते और ओवैसी जैसे नेता पाकिस्तान में होते क्योंकि डाॅ. अम्बेडकर के लिए वोटबैंक नहीं वरन देश महत्वपूर्ण था।

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सड़क सुरक्षा सप्ताह के 6वें दिन कठुआ पुलिस की ओर से रैली का आयोजन किया 

कठुआ 16 जनवरी । सड़क सुरक्षा सप्ताह के 6वें दिन कठुआ पुलिस की ओर से रैली का आयोजन किया गया, जिसमें हायर सेकेंडरी स्कूल गर्ल्स की छात्राओं सहित शहर के गणमान्य लोगों ने कठुआ में रैली निकालकर लोगों को यातायात के प्रति जागरूक किया। इस अवसर पर छात्राओं ने सड़क सुरक्षा से संबंधित पोस्टर बैनर भी हाथ में लिए थे। इन पोस्टर बैनरों पर अरकर्षित यातायात संबंधित स्लोगन लिखे हुए थे। वहीं रैली के दौरान छात्राओं ने लोगों को यातायात नियमों के बारे में जानकारियां भी दी और नारे लगा कर यातायात नियमों का पालन करने के लिए संदेश दिए। गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल गर्ल्स में बीरवार को सुबह सैकड़ों छात्राएं इकट्ठे हुई, जहंा से पुलिस प्रशासन द्वारा हरी झंडी दिखाकर रैली को रवाना किया गया। वही हायर सेकेंडरी से होते हुए ओल्ड सुपर बाजार, शहीदी चैक, अंबेडकर ब्रिज, ओल्ड बस स्टैंड, पार्लिबंड से होते हुए मुखर्जी चैक से वापिस हायर सेकेंडरी में संपन्न हुई।

 

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श्रीनगर में लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी निसार अहमद डार गिरफ्तार

श्रीनगर । सुरक्षा बलों ने शुक्रवार देररात श्रीनगर के बोन ऐंड जायंट अस्पताल बरजुला के पास से लश्कर-ए-तैयबा के खूंखार आतंकी निसार अहमद डार को गिरफ्तार किया है। आतंकी डार बांडीपोरा के हाजिन क्षेत्र का रहने वाला है। कुल्लन गांदरबल में हुई  मुठभेड़ में वह बचने में सफल हो गया था। इस मुठभेड़ में एक पाकिस्तानी आतंकवादी मारा गया था। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है।  लश्कर के इस खूंखार आतंकी की गिरफ्तारी सेना की 13 आरआर और एसओजी के संयुक्त कार्यदल ने की है। वह वर्ष 2018 से सक्रिय था। निसार तीन-चार दिन पहले गांदरबल में सुरक्षाबलों की घेराबंदी में बच निकला था और श्रीनगर आ गया था। अधिकारियों ने बताया है कि उसे शुक्रवार रात घेरा गया। इस दौरान उसने भागने की कोशिश की पर वह इसमें कामयाब नहीं हो सका। श्रीनगर में उसके साथ आए अन्य आतंकियों की तलाश की जा रही है। पुलिस को प्रारंभिक पूछताछ में उसने गांदरबल, बांडीपोर और श्रीनगर में सक्रिय लश्कर के कुछ आतंकियों और भूमिगत छह आतंकियों की जानकारी दी है।

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नौशेरा में दो जवान शहीद, आतंकियों की तलाश जारी

जम्मू । राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर के मंगला देई इलाके में मंगलवार आधीरात बाद घात लगाकर बैठे आतंकियों के हमले में दो भारतीय जवान शहीद हो गए। सुरक्षाबलों ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया है। समाचार लिखे जाने तक सुरक्षाबल, आतंकियों की तलाश कर रहे हैं।  सूत्रों के अनुसार मंगला देई इलाके में कुछ संदिग्धों के दिखने के बाद सुरक्षा बलों  ने तलाशी अभियान शुरू किया था। इस दौरान घात लगाकर बैठे आतंकियों ने सुरक्षाबलों को देखते ही गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद भारतीय जवानों ने मोर्चा संभालते हुए जवाबी गोलीबारी की। इस मुठभेड़ सेना के दो जवान शहीद हो गए। अधिकारियों का कहना है कि मुठभेड़ में एक या दो दो आतंकी भी मारे गए हैं लेकिन उनके शव न मिलने से पुष्टि नहीं की जा सकती। मुठभेड़ स्थल को चारों तरफ से घेर लिया गया है। सेना का पैरा कमांडो दस्ता भी मौके पर पहुंच गया है।  उल्लेखनीय है कि सोमवार रात घने कोहरे का लाभ उठाकर चार-पांच आतंकियों का दल कथित तौर पर नियंत्रण रेखा से भारतीय इलाके में दाखिल हुआ था।  यह जानकारी मिलते ही सेना ने तलाशी अभियान चलाते हुए उन सभी इलाकों में विशेष नाके लगाए, जहां से आतंकी जिला राजौरी के भीतरी इलाकों में दाखिल हो सकते थे।

 

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विश्व प्रसिद्ध डल झील बनी बर्फ, पानी की पाइप लाइन जमने से दिक्कत

– जम्मू-कश्मीर में शीत लहर का प्रकोप, हड्डियां जमा देने वाली ठंड
– घने कोहरे, बादलों और सर्द हवाओं से जनजीवन प्रभावित
जम्मू  । जम्मू-कश्मीर में शीत लहर का प्रकोप लगातार जारी है। जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में घने कोहरे, बादलों और सर्द हवाओं से जनजीवन प्रभावित है। कश्मीर घाटी में विश्व प्रसिद्ध डल झील के साथ अन्य कई जल स्थल जम जाने से पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों को पानी की दिक्कतें आ रही हैं। कड़ाके की ठंड के चलते कई स्थानों पर पानी की पाइप लाइन जम गई है। इसके चलते इलाके में पानी की कमी महसूस की जा रही है। यही नहीं लोगों को पानी लेने के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है। कश्मीर संभाग में चिल्ले कलां के बीच हड्डियां जमा देने वाली ठंड पड़ रही है। पिछले दिनों हुई बर्फबारी वाले इलाकों में जनजीवन अधिक प्रभावित है। सर्दी के कारण लोग जरूरी कार्यों के लिए ही बाहर निकल रहे हैं। जम्मू में रविवार सुबह से ही कोहरा छाया हुआ है। कोहरे के बीच बाजारों में निकलना मुश्किल है। मौसम विज्ञान केद्र के अनुसार इस वर्ष दिसंबर महीना पिछले कई वर्षों के मुकाबले ठंडा रहा है। मौसम के इस प्रकोप के बीच आम आदमी का जीना मुश्किल है। बाजारों में भी आम दिनों के मुकाबले रौनक बहुत कम चल रही है। दूसरे राज्यों से आने वाले सैलानियों में उत्साह की कमी नहीं है। जम्मू संभाग में रविवार दोपहर को हल्की धूप निकली फिर पूरे दिन बादल छाए रहे। इस ठंड से जनजीवन बुरी तरह से ठिठुर रहा है।  मौसम विज्ञान केंद्र श्रीनगर के अनुसार 31 दिसम्बर से जम्मू-कश्मीर में मौसम का मिजाज बदलने के आसार हैं। इसमें 31 दिसंबर से 2 जनवरी तक जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कई हिस्सों में बारिश के साथ बर्फबारी हो सकती है।
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जम्मू-कश्मीर में शीत लहर का प्रकोप लगातार जारी, घने कोहरे, बादलों और सर्द हवाओं से जनजीवन प्रभावित

जम्मू 29 दिसम्बर (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर में शीत लहर का प्रकोप लगातार जारी है। जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में घने कोहरे, बादलों और सर्द हवाओं से जनजीवन प्रभावित है। कश्मीर घाटी में विश्व प्रसिद्ध डल झील के साथ अन्य कई जल स्थल जम जाने से पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों को पानी की दिक्कतें आ रही हैं। कड़ाके की ठंड के चलते कई स्थानों पर पानी की पाइप लाइन जम गई है। इसके चलते इलाके में पानी की कमी महसूस की जा रही है। यही नहीं लोगों को पानी लेने के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है। कश्मीर संभाग में चिल्ले कलां के बीच हड्डियां जमा देने वाली ठंड पड़ रही है। पिछले दिनों हुई बर्फबारी वाले इलाकों में जनजीवन अधिक प्रभावित है। सर्दी के कारण लोग जरूरी कार्यों के लिए ही बाहर निकल रहे हैं।  जम्मू में रविवार सुबह से ही कोहरा छाया हुआ है। कोहरे के बीच बाजारों में निकलना मुश्किल है। मौसम विज्ञान केद्र के अनुसार इस वर्ष दिसंबर महीना पिछले कई वर्षाे के मुकाबले ठंडा रहा है। मौसम के इस प्रकोप के बीच आम आदमी का जीना मुश्किल है। बाजारों में भी आम दिनों के मुकाबले रौनक बहुत कम चल रही है। दूसरे राज्यों से आने वाले सैलानियों में उत्साह की कमी नहीं है। जम्मू संभाग में रविवार दोपहर को हल्की धूप निकली फिर पूरे दिन बादल छाए रहे। इस ठंड से जनजीवन बुरी तरह से ठिठुर रहा है।   मौसम विज्ञान केंद्र श्रीनगर के अनुसार 31 दिसंबर से जम्मू-कश्मीर में मौसम का मिजाज बदलने के आसार हैं। इसमें 31 दिसंबर से 2 जनवरी तक जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कई हिस्सों में बारिश के साथ बर्फबारी हो सकती है।
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जम्मू-कश्मीर में मौसम साफ रहने के बावजूद बर्फीली हवाएं जारी

जम्मू । जम्मू-कश्मीर में मौसम साफ रहने के बावजूद बर्फीली हवाओं के कारण कड़ाके की ठंड से फिलहाल कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। कंपकंपा देने वाली सर्दी के बीच जम्मू में शुक्रवार को सीजन का सबसे सर्द दिन रहा। शुक्रवार को जम्मू का दिन का तापमान 10.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।  इसी तरह श्री माता वैष्णो देवी के आधार शिविर कटड़ा में भी सीजन का सर्द दिन बीता। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के तापमान में गिरावट से जनजीवन प्रभावित है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में शीत लहर का प्रकोप भी लगातार जारी हैं।  जम्मू में दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से 9.6 डिग्री सेल्सियस से गिरकर 10.8 डिग्री सेल्सियस रहा जबकि बीती रात का न्यूनतम तापमान सामान्य से 1.8 डिग्री गिरकर 6.4 डिग्री सेल्सियस रहा। कटड़ा में दिन का पारा सामान्य से 8.8 डिग्री गिरकर 9.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भद्रवाह का माइनस 2.7 डिग्री के साथ सबसे ठंडा रहा। बटोत का तापमान माइनस 0.2 और बनिहाल में 2.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।  मौसम विज्ञान केंद्र श्रीनगर के उपनिदेशक डा. मुख्तियार अहमद के अनुसार 30 दिसंबर तक ठंड से राहत नहीं मिलेगी लेकिन अगले एक सप्ताह तक मौसम साफ रहेगा। इसमें कोहरे के साथ तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी। जनवरी के शुरू में कुछ हिस्सों में बारिश के साथ मौसम में सुधार हो सकता है।
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जम्मू में गुरूवार सुबह 8.20 बजे से शुरू होगा सूर्यग्रहण, एक चमकदार रिंग की तरह दिखाई देगा

जम्मू, । जम्मू-कश्मीर में 26 दिसंबर यानि गुरूवार को सुबह 8.20 बजे से सूर्यग्रहण शुरू हो जाएगा। यह सूर्यग्रहण सुबह 10ः49 बजे समाप्त होगा। सूर्य ग्रहण का सूतक काल 25 दिसंबर की रात 8 बजे से शुरू होगा। ग्रहण के प्रभाव के चलते सूतक काल से ही मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे। यह सूर्य ग्रहण दक्षिण भारत में सबसे बेहतर तरीके से देखा जा सकेगा। ग्रहण के दौरान सूर्य एक चमकदार रिंग की तरह दिखाई देगा।   जम्मू के प्रसिद्ध मंदिरों के पंडितों के अनुसार ग्रहण काल में सबसे ज्यादा सावधानी गर्भवती महिलाओं को रखनी चाहिए क्योंकि इस दौरान वे सबसे ज्यादा संवेदनशील होती हैं और गर्भस्थ शिशु पर ग्रहण काल का विपरीत असर पड़ सकता है। उनके अनुसार घर में रखे पानी व खाने-पीने की चीजों में कुशा या फिर तुलसी के पत्ते डाल देने चाहिए। इससे पानी दूषित नहीं होता है। यह बात वैज्ञानिक रूप से भी तर्कसंगत है क्योंकि तुलसी में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट आसपास मौजूद दूषित कणों को मार देते हैं। इसलिए खाद्य पदार्थ में डालने से उस भोजन पर ग्रहण का असर नहीं होता।  सूत्रों के अनुसार इस सूर्य ग्रहण के प्रभाव से पाकिस्तान एवं सिंध प्रदेश में आतंकी घटनाओं में वृद्धि होगी। जम्मू-कश्मीर, चीन एवं मुस्लिम राष्ट्रों में राजनीतिक उथल-पुथल होगी। ग्रहण के समय धनु राशि में बुध की युति सूर्य और चंद्रमा से हो रही है जिस कारण इसके अशुभ फल तुरंत दिखाई देंगे।
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पाकिस्तान लगातार कर रहा घुसपैठ की कोशिशें-डीजीपी

जम्मू। सांबा जिले के विजयपुर में स्थित जम्मू-कश्मीर पुलिस तकनीकी प्रशिक्षण संस्थान में सोमवार को पुलिस कांस्टेबल के दूसरे बैच की पासिंग आउट परेड आयोजित हुई। इस परेड की सलामी जम्मू-कश्मीर पुलिस के महानिदेशक (डीजीपी) दिलबाग सिंह ने ली। इस दौरान डीजीपी ने पासिंग आउट होने वाले कांस्टेबलों को बधाई देते हुए कहा कि वे देश व समाज की रक्षा-सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। पासिंग आउट परेड के दौरान डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा कि नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान लगातार घुसपैठ की कोशिशें कर रहा हैं।  जिसका हमारे देश के जवान जवाबी कार्रवाई कर मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीमा पर स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है।  उन्होंने आगे कहा कि रविवार को जैश के एक आतंकवादी को त्राल से गिरफ्तार किया गया है और लश्कर आतंकवादी मॉड्यूल का भी भंडाफोड़ किया गया है।