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मास्क न पहनने वालों एवं सोशल डिस्टेंशिंग का पालन नहीं करने पर 20 हजार 200 रुपये का जुर्माना

मास्क न पहनने वालों एवं सोशल डिस्टेंशिंग का पालन नहीं करने पर 20 हजार 200 रुपये का जुर्माना

     कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए प्रदेश सरकार के निर्देश पर बालाघाट जिले में भी मास्क न पहनने वाले व्यक्तियों के लिए ‘रोको-टोको ‘ कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में कलेक्टर श्री दीपक आर्य के मार्गदर्शन में निगरानी दलों द्वारा नगरीय क्षेत्र बालाघाट में मास्क नहीं पहनने वालों एवं साशल डिस्टेंशिंग का पालन नहीं करने वालों से 20 हजार 200 रुपये का जुर्माना वसूल किया है।अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बालाघाट श्री के सी बोपचे के द्वारा गठित 4 चार दल ने 22 जुलाई की शाम को बालाघाट शहर के विभिन्न स्थानों पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन ना करने एवं बिना मास्क लगाए शहर में भ्रमण करते हुए पाए जाने पर कार्यवाही करते हुए एक्सो 12 लोगों पर जुर्माने की कार्यवाही की गई और 20 हजार 200 वसूल किए गए। इसमें 5600 रुपये विभिन्न व्यापारिक प्रतिष्ठानों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन ना करने तथा ग्राहकों द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने पर जुर्माना किया गयाहै। इसके साथ ही काली पुतली चौक पर स्थित चुलबुल चाय दुकान पर जुर्माना आरोपित कर दुकान को आगामी आदेश तक के लिए सील कर दिया गया है। सभी व्यापारिक प्रतिष्ठानों के मालिकों को निर्देशित किया गया है कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाएं और बिना मास्क के ग्राहकों को प्रवेश ना दें और हैंड सेनीटाइजर या हैंड वॉश का उपयोग करें।

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किसान क्रेडिट कार्ड किसानों के लिए बना अभिशाप – कर्ज अदाएगी के बाद भी किसान हुआ डिफाल्टर

किसान क्रेडिट कार्ड किसानों के लिए बना अभिशाप – कर्ज अदाएगी के बाद भी किसान हुआ डिफाल्टर
विगत 06 माह से जिलें मेे किसानो के करीब 30 करोड़ रूपये का नहीं है हिसाब
परसवाड़ा – किसान कल्याण और सेवा का राग अलापते हुए कोई सरकार नहीं थकती, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल की सरकार हो, परन्तू किसानों की जो बदत्तर हालत है वह किसी से छुपी नहीं है, बालाघाट जिले के परसवाड़ा विकासखण्ड़ के किसानों की हालत तो अत्यन्त ही दयनीय है, जहां कर्ज माफी के झुठे चक्कर में पड़़कर कई किसान डिफाल्टर हो गये तो कई किसानो को आज किसान क्रेडिट कार्ड का लाभ मिलना तो दूर, पूर्व में उठाए गए केडिट लोन की वजह से मूलधन चुकाने के बाद भी ब्याज भर कर सरकार की झोली भरना पड़ रहा हैै।
किसानों द्वारा केडिट कार्ड के माध्यम से प्रत्येक वर्ष सहकारी समितियों के माध्यम से नकद एवं वस्तू अर्थात खाद का उठाव किया जाता है, जिसको निर्धारित समय सीमा में सहकारी समिति में वापस जमा कर शुन्य प्रतिशत ब्याजदर में मिलने वाली सहूलियतों का फायदा उठाकर किसान अपना खेती कार्य कर जीवन यापन करता है, परन्तू विगत दो वर्षो से परसवाड़ा क्षेत्र का लगभग हरेक किसान अब इसी किसान क्रेडिट कार्ड योजना की वजह से कंगाल और कर्जदार बनता जा रहा है, जहां विगत वर्षो में खरीदी गई धान की अंतर की राशि 350 रूपये प्रतिक्विंटल एक वर्ष बाद भी अभी तक किसानों को नहीं मिली, वहीं चालू सत्र 2018 -2019 , और 2019 – 2020 के दौरान केसीसी के माध्यम से किसानों को प्रदाय लोन की राशि कथिततौर पर किसानों के कर्ज खाते में नहीं आने से किसान आर्थिक और मानसिक रूप से अत्यधिक परेशान और प्रताडि़त है, क्योकि सहकारी समितियों के रिकार्ड के अनुसार क्षेत्र के दौ सैकड़ा से भी अधिक किसानों ने अभी तक कर्ज की राशि का भुगतान समिति को नहीं किया है, जबकि किसानों से समिति के माध्यम से धान उपार्जन के दौरान किसानों के कर्ज की राशि की पहले ही अदाएगी कर शेष राशि का भुगतान किसानों के बचत खाते में कर दिया गया है, जिसका प्रमाण उपार्जित धान के तौल पत्रक से स्पष्ट होता है।
किसान क्रेडिट कार्ड ने किसानों को बनाया कर्जदार – सरकार द्वारा किसानों का जीवन स्तर उपर उठाने और उन्हें साहूकारों के कर्ज के चुंगल से बचाने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड योजना प्रारम्भ की गई थी , परन्तू यही किसान क्रडिट कार्ड अब किसानों के लिए गले की फांस बन गया है , विगत वर्षानुसार किसानों द्वारा योजनान्तर्गत समितियों से कर्ज उठाया गया, और कर्ज अदाएगी की निर्धारित अवधि के अंदर ही उसे बिक्रित धान से भुगतान कर जमा भी कर दिया गया, इस प्रकार किसान समिति के कर्ज से मुक्त हो गया, सोचकर वापस नये सत्र 2020 के लिए जब लोन और खाद के लिए समिति गया तो उसे बताया गया कि उसके पिछले कर्ज की राशि का भुगतान नहीं किया गया है, इसी वजह से किसान अब डिफाल्टर हो गया है, जिसे केसीसी का लाभ नहीं दिया जा सकता, जब किसानों द्वारा उपार्जित धान का तौल पत्रक दिखाकर बताया गया कि आपके समिति के माध्यम से ही पूर्व में किसान द्वारा बेची गयी धान से कर्ज की वसूली हो चुकी है, एैसे मेें कोई कर्ज किसान के उपर शेष नहीं बचता, तो फिर किसान डिफाल्टर कैसे को गया।
सहकारी समिति के अधिकारीयों द्वारा किसानों को बताया गया कि आपके लोन की राशि हमारे द्वारा धान उर्पाजन से काट लिया गया है यह सत्य है, परन्तू अभी तक उक्त लोन की राशि किसानों के लोन खाते में नहीं पहुंचने के कारण सहकारी बैंक द्वारा किसानों को कर्ज मुक्त नहीं किया गया है, जिसके चलते किसानों को केसीसी का लाभ हम नहीं दे सकते । इस प्रकार देखा जाए तो किसानों द्वारा लगभग 6 माह पूर्व ही अपने कर्ज की राशि का भुगतान समिति को कर चुका है, बावजूद इसके आज भी किसान न सिर्फ समिति का कर्जदार है बल्कि अब ब्याज का भी देनदार बन गया है, सबसे बड़ी परेशानी तो उन किसानों के सामने आकर खड़ी हो गई है जिनका लोन कालातीत हो गया था, तथा बुमुश्किल डिफाल्टर से सक्रिय किसान बनने के लिए उन्होने धान उपार्जन के दौरान समिति को धान बेचकर अपना कर्जा चुकता किया था, परन्तू उनकी राशि उनके लोन खाते में नहीं आने के कारण आज भी वे न सिर्फ डिफाल्टर बने हुए है बल्कि उनके उपर 14 प्रतिशत की दर से ब्याज भी ठोका जा रहा है।
साहूकारों के चंगुल में फंसा किसान – चुंकि वर्तमान समय में धान की रोपाई का कार्य चालू है, और मानसून सक्रिय है, यदि किसान द्वारा इस समय रोपाई का कार्य नहीं करेगा तो स्वाभाविक है कि खेती कार्य में वह पिछड़ जाएगा, और उसे फसल का उत्पादन नहीं मिलेगा, केसीसी का लाभ न मिलने की वजह से किसान की आर्थिक स्थिती डगमगा गई और उसे ना चाहते हुए भी साहूकारों के चंगुल में फंसना पड़ा, जहां उसे उचे दामों में बीज मिला और ज्यादा ब्याजदर के साथ कर्ज। वहीं कुछेक किसानों द्वारा अपने जेवरात बेचकर रोपाई कार्य का पूर्ण करना पड़ रहा है, इस समय यहां किसानों की हालत बहूत ही दयनीय और चिन्ताजनक बनी हुई है।
प्राप्त जानकारी अनुसार परसवाड़ा क्षेत्र अन्तर्गत आने वाली समितियां परसवाड़ा, बघोली और बोदा के कुल 347 किसान एैसे है जिनके करीब 01 करोड़ 82 लाख रूपये की लोन की राशि नहीं आने के कारण आज आर्थिक कंगाली के दौर से गुजर रहे है, और लगभग समस्त किसानों ने या तो अपने घर के जेवरात बेचकर धान की रोपाई की है, या फिर साहूकारों के कर्ज के तले दबकर किसी तरह अपना खेती कार्य कर रहा है। कोरोनाकाल की वजह से जहां पूर्व से ही लोगों के आर्थिक हालात बिगड़े हुए है, वहीं सोसायटी की इस मार से किसान मानों अब टूट सा गया है।
गोलमाल है कहां – बहरहाल कर्ज के तले दबकर ही सही किसान अपना कार्य किसी तरह कर तो रहा है लेकिन सवाल पैदा होता है कि आखिर गोलमाल है कहां, जिसकी वजह से बेवजह ही किसान के सामने आज बड़ी आर्थिक समस्या खड़ी हो गई है। इस विषय में कुछेक किसानों द्वारा सम्बन्धित अधिकारीयों से आवेदन और निवेदन कर समस्या के निदान की मांग रखी परन्तू किसी भी अधिकारी द्वारा मामले का समाधान करने के बजाय एक दूसरे पर दोषारोपण किया गया, जानकारी अनुसार यह विषम स्थिती सिर्फ परसवाड़ा विकासखण्ड़ की नहीं अपितू पूरे बालाघाट जिले की है, जहां के हजारों किसानों के करीब 30 करोड़ रूपये की बड़ी राशि का पिछले करीब 6 माह से कोई अता पता नहीं है, जब धान का विक्रय हो गया, तो उक्त करोड़ों की राशि आखिर गई कहां, करोड़ो की बात हो , और उसका कोई हिसाब किताब नहीं , इससे समझ आता है मामला बहूत बड़े घोटाले का है, यदि यह करोड़ों की राशि को कोई ब्याज में खेल रहा हो तो इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता। हरेक छोटे मोटे मामले को तूल देकर अपने राजनीतिक रोटी सेकने वाले नेताओं की चुप्पी भी इस मामले में संदेहास्पद है । वहीं किसानों की बात पर देश और प्रदेशों की सत्ता में काबिज सरकार की किसानों के प्रति इस भंयकर अनदेखी ने भी किसानों को आश्चर्य में डाल रखा है। मामले का संज्ञान लेकर कोई जनप्रतिनिधी या सरकारी नुमांइदा क्या इस मामले में रूचि लेता है या फिर किसानों को उनकी फुटी किस्मत पर छोड़ देता है, यह तो आने वाला ही समय बताएगा।
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घुनाड़ी में एक 14 वर्षीय बालिका कोरोना पॉजिटीव..

घुनाड़ी में एक 14 वर्षीय बालिका कोरोना पॉजिटीव..

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महाराष्ट्र की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने मुख्यमंत्री सहायता कोष में अधिक से अधिक दान करें.. – राकेश ठाकुर

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14 दिन तक हॉस्पिटल आईसोलेटेड रहेंगे गोंदिया के कोरोना संक्रमित युवक और अन्य 8 लोग, गोंदिया जिले में विदेश यात्रा कर पहुंचे कुल 221 लोग

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भयावह कोरोना संकट के हालातों में भी गोंदिया नगर परिषद कर रही लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ – मुकेश शिवहरे

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स्‍वागत है आपका लक्की स्‍टोर्स गोंदिया में..

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3 से 13 मार्च तक विभिन्न देशों से 32 विदेशी पर्यटकों ने ली नेशनल पार्क कान्हा में विभिन्न रिसोर्ट की शरण..

प्रशासन ने रिसोर्ट संचालकों की जांच के दिये आदेश..
जगप्रेरणा डॉट कॉम, बैहर/बालाघाट। 9329033433
बालाघाट और मंडला जिले के बीच स्थित कान्हा किसली नेशनल पार्क में भ्रमण करने के लिये प्रतिवर्ष भारी संख्या में विभिन्न देशों के पर्यटकों का जंगली जानवरों को देखने और सघन वन क्षेत्र में निश्चिंतता का समय बिताने के लिये आगमन होता है। इस वर्ष भी 3 से 13 मार्च के बीच लगभग 32 पर्यटकों का विभिन्न देशों के फ्रांस, जर्मनी, यूनाईटेड किंगडम, इटली, ऑस्टे्रलिया, यूनाईटेड स्टेट ऑफ अमेरिका आदि देशों से आगमन हुआ, तथा यह विदेशी पर्यटक कान्हा के जंगल लॉज, चितवन जंगल लॉज, शेरगढ़ टेंडेड कैम्प, कैम्प देव विलास, सेलीब्रेशन वन विलास, स्टेलरिंग कान्हा आदि विभिन्न रिसोर्ट में शरण ली, और यहां पर दो तीन दिन तक रुक कर फिर ये विदेशी पर्यटक अन्य स्थानों की ओर रवाना हो गए। इन विदेशी पर्यटकों के संबंध में जानकारी मिलने के बाद इनके संपर्क में होटल रिसोर्ट के अनेक कर्मचारी भी आए तो वहीं इन्हें भ्रमण करवाने वाले गाईड, वाहन चालकों के साथ ही ये अन्यत्र जिले से रवाना होने के दौरान भी किन किन के संपर्क में आए, इसकी जांच की जा रही है।
सभी चिन्हित लोगों को रखा जा रहा निगरानी में.. – कलेक्टर दीपक आर्य
बालाघाट कलेक्टर दीपक आर्य ने इस संबंध में जगप्रेरणा से चर्चा में कहा कि विदेश से बालाघाट पहुंचने वाले पर्यटकों के अलावा विदेश यात्रा कर जिले में पहुंचने वाले एवं विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में अन्य महानगरों से भ्रमण कर पहुंचने वाले लोगों की और उनके संबंध में आने वाले लोगों की निगरानी रखी जा रही है। संपूर्ण जानकारी एवं चिकित्सा व्यवस्थाओं के लिये स्वास्थ्य कर्मचारियों के अलावा आशा कार्यकर्ताओं, ग्राम पंचायत सरपंचों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी निर्देश दिये गए हंै। कलेक्टर श्री आर्य ने कहा कि लोग पूरा समय सिर्फ घर पर व्यतीत करें, घर से नहीं निकलें, और किसी के भी संपर्क में ना आएं, ताकि विश्व के लिये घातक बन चुके कोरोना वायरस के संक्रमण से मुकाबला कर उसे खत्म करने में सफलता प्राप्त हो। कलेक्टर श्री आर्य ने कहा कि फिलहाल बालाघाट जिले में कोई कोरोना वायरस पॉजीटीव नहीं पाया गया है।

 

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जागरुक महिला संगठन की महिलाओं ने किया नि:शुल्क मास्क वितरण

जगप्रेरणा डॉट कॉम।
म.प्र. के बैतुल जिले के सारणी तहसील में घरेलु महिलाओं ने अपना एक जागरुक महिला संगठन बनाया है, और इस संगठन के माध्यम से जहां वे अनेक सामाजिक सेवाओं के कार्य को अंजाम देती हैं, वहीं कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिये भी जागरुक महिला संगठन की महिलाओं ने सराहनीय पहल की है। कोरोना वायरस के जानलेवा संक्रमण की तीव्रता को रोकने के लिये शासन प्रशासन जिस तरह से प्रयास कर रहा है, वहीं इन महिलाओं ने भी कत्र्तव्य निभाते हुए प्रतिदिन 3 से 4 घंटे तक घरों में सिलाई कर नए कपड़ों के मास्क तैयार किये हैं, और मास्क को सेनेटराईज करते हुए महिलाओं द्वारा सारणी नगर पालिका के कर्मचारियों एवं मजदूरों, रिक्शा चालकों, आटो रिक्शा चालकों तथा स्लम एरिया में पहुंचकर बड़ी संख्या में मास्क का वितरण किया, इसके साथ ही झुग्गी झोपड़ी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को कोरोना वायरल कोविड 19 की जानकारी देते हुए महिलाओं द्वारा सावधानी, सुरक्षा का ध्यान रखते हुए स्वच्छता रखने एवं मास्क तथा सेनेटाईजर सामग्रीयां घर में ही बनाने के उपाय बताते हुए सावधानी के लिये आवश्यक जानकारीयां भी प्रदान की। जागरुक महिला संगठन की प्रतिनिधि श्रीमती रीनु पचोरिया ने जगप्रेरणा को बताया कि नगर पालिका द्वारा भी सफाई कर्मचारियों को मास्क का वितरण किया गया, परंतु वे मास्क का उपयोग करते नहीं पाए गए, जिसके लिये उन्हें जागरुक किया गया, और मास्क वितरण करते हुए उन्हें निरंतर मास्क लगाकर सफाई कार्य करने के लिये प्रेरित किया गया। संगठन की संचिता गुप्ता ने होम मेड सेनेटाईजर घर में ही बनाने की विधि बताई, श्रीमती निशा पाण्डेय द्वारा जनता कफ्यू एवं कोरोना से डरे बिना मुकाबला करने के लिये प्रेरत जानकारियां प्रदान की। जागरुक महिला संगठन द्वारा मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्री मेश्राम एवं भावसार व समस्त कर्मचारियों की उपस्थिति में नगर पालिका सफाई कर्मचारियों को मास्क वितरण किया, इस दौरान महिला संगठन की सदस्यों में प्रमुख रुप से श्रीमती नीलम सिंह, राधा निगम, निशा पाण्डेय, रीनु पचौरिया, संचिता गुप्ता, शंकुन्तला शास्त्री, सुनीता राने, मालती साहु, दुर्गा पन्द्रे, सल्लो धुर्वे उपस्थित थी।